किसानों के साथ धोखाधड़ी? खाद गोदाम पर तय कीमत से ज्यादा वसूली के आरोप
मुरैना। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को सुचारू रूप से और तय दामों पर उर्वरक मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-टोकन व्यवस्था पर अब सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। मुरैना जिले के कृषकों ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि खाद गोदाम के प्रभारी अभिषेक शर्मा ई-टोकन प्रणाली लागू होने के बाद भी तय सरकारी रेट से ज्यादा पैसों की मांग कर रहे हैं। पीड़ितों के मुताबिक, जिस खाद की शासकीय कीमत 3,700 रुपये तय की गई है, उसके बदले उनसे जबरन 3,800 रुपये वसूले जा रहे हैं।
लंबी लाइनों में खड़े रहने को मजबूर अन्नदाता
उर्वरक की किल्लत और वितरण व्यवस्था में खामियों के चलते आज भी बड़ी तादाद में काश्तकारों को कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच घंटों लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था की शुरुआत इसलिए की थी ताकि वितरण केंद्रों पर भीड़भाड़ नियंत्रित हो सके और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए, परंतु जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है और उन्हें पहले की तरह ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर शिकायत और जांच की मांग
इस अवैध वसूली और प्रशासनिक अव्यवस्था से तंग आकर एक जागरूक किसान ने सोशल मीडिया के जरिए सीधे मुरैना कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराया है। अपनी ऑनलाइन शिकायत में किसान ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे घपले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की गुहार लगाई है, साथ ही तय दाम से अधिक राशि वसूलने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
कालाबाजारी और आर्थिक शोषण की आशंका
यदि किसानों द्वारा लगाए गए ये आरोप जांच में सच साबित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी नियमों और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा होगा, बल्कि खाद की कालाबाजारी और भोले-भाले किसानों के आर्थिक शोषण का एक बड़ा मामला भी बन जाएगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या एक्शन लिया जाता है।
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