मास्को से जामनगर तक बढ़ती नजदीकी, ग्लोबल पॉलिटिक्स में हलचल
एक बार फिर से मास्को का दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी जामनगर से कनेक्शन जुड़ गया है. ये रिफाइनरी किसी और की नहीं बल्कि एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी की है. रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी की जामनगर रिफाइनरी ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है. इस बार रिलायंस इंडस्ट्री की सप्लाई उन रूसी कंपनियों से आ रही है, जिनपर कोई अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंध नहीं है. कुछ दिन पहले खबर आई थी के रिलायंस ने प्रतिबंधों की वजह से रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है और मिडिल ईस्ट से सप्लाई बढ़ा दी है |
प्रतिबंधित कंपनियों के पीछे हटने और गैर प्रतिबंधित कंपनियों के आगे आने के बाद से एक बार फिर से रिलायंस ने रूसी तेल की सप्लाई बढ़ाने का फैसला लिया है. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एक बार फिर से अमेरिका और यूरोप में टेंशन बढ़ सकती है. क्योंकि भारत पर रूसी तेल खरीदने पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगा हुआ है. साथ ही रूसी तेल को मार्केट में आने से रोकने के लिए अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगा दिया था. वहीं दूसरी ओर यूरोप भी रूसी तेल को इसी तरह की सोच रखे हुए है |
रिलायंस ने फिर ली रूसी सप्लाई
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है. कंपनी गैर प्रतिबंधित सप्लायर्स से तेल खरीद रही है और उसे गुजरात स्थित अपनी रिफाइनरी में भेज रही है. ब्लूमबर्ग को सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी ने रुसएक्सपोर्ट से अफ्रामैक्स टैंकर्स का अनुबंध किया है और घरेलू ग्राहकों को सप्लाई करने वाले 660,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाले प्लांट में तेल भेज रही है. बाजार में इसकी वापसी से रूसी तेल की भारत की खरीद में आई गिरावट को कम करने की संभावना है, जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि इस महीने यह आधे से भी अधिक हो सकती है |
दो कंपनियों पर लगाया था प्रतिबंध
अक्टूबर में वाशिंगटन द्वारा यूक्रेन वॉर के लिए क्रेमलिन के धन को रोकने के प्रयास में मॉस्को के दो टॉप प्रोड्यूसर्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद तेल बाजार रूसी निर्यात के भविष्य पर नजर रखे हुए है. इससे भारतीय रिफाइनरीज को प्रतिबंधित न किए गए रूसी संस्थाओं से निर्यात का सहारा लेना पड़ा है – साथ ही अन्य जगहों से महंगे विकल्पों का भी – हालांकि रूसी प्रवाह में अभी भी भारी गिरावट की उम्मीद है |
अमेरिका द्वारा 22 अक्टूबर को रोसनेफ्ट पीजेएससी और लुकोइल पीजेएससी पर प्रतिबंध लगाने और रिफाइनरियों को इन दोनों उत्पादकों के साथ लेनदेन समाप्त करने के लिए एक महीने का समय देने के बाद रिलायंस ने स्वयं रूसी खरीद रोक दी थी. सूत्रों के अनुसार, गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कैंपस का स्वामित्व और संचालन करने वाली रिलायंस को 22 अक्टूबर से पहले अनुबंधित जहाजों को प्राप्त करने के लिए एक अतिरिक्त महीने का समय दिया गया था |
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