महाकुंभ: 12 अखाड़ों ने कई संन्यासियों को किया नागा साधु बनाने से इनकार
प्रयागराज। महाकुंभ में आए साधु-संत अपनी कठिन तप की वजह से सुर्खियों में हैं तो कोई अपने रंग-रूप को लेकर चर्चाओं में है। इनमें सबसे ज्यादा महामंडलेश्वर और नागा साधु आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नागा साधु की राह बहुत ज्यादा कठिन है। बेहद अनुशासित जीवन और सनातन के प्रति समर्पण के बाद ही वह नागा साधु कहलाते हैं। अखाड़े किसी भी परिस्थिति में इससे समझौता नहीं करते हैं।
महामंडलेश्वर और नागा साधु बनने के लिए अनुशासन, जीवन में सच्चाई और सनातन के प्रति पूरी तरह समर्पण का भाव अखाड़ों के लिए सर्वोपरि है। इनके साथ किसी तरह का समझौता अखाड़ों को बर्दाश्त नहीं है। इस बार भी नियमों का खरा नहीं उतरने की वजह से 12 महामंडलेश्वर पद के आवेदक और 92 नागा संन्यासी को अनुत्तीर्ण कर दिया गया। जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा और बड़ा निरंजनी अखाड़ा ने इन्हें पद देने से इनकार कर दिया है। जांच में उनकी छवि धर्म आर परंपरा के विपरीत मिलने पर उनके आवेदनों को रद्द कर दिया।
महाकुंभ 2025 में हर अखाड़े में महामंडलेश्वर और नागा साधुओं को बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। महामंडलेश्वर उसे बनाया जाता है जो पहले संन्यासी जीवन का पालन कर रहा होता है और विरक्त जीवन का संकल्प लेने वालों को नागा साधु की पदवी दी जाती है। इसकी प्रक्रिया में तीन स्तरीय जांच होती है। मकर संक्रांति के बाद से अब तक कई अखाड़ों में 30 महामंडलेश्वर और 3500 नागा साधु बनाए गए हैं। वसंत पंचमी को तीसरे अमृत स्नान तक महामंडलेश्वर पद के लिए पट्टाभिषेक और नागा संन्यासियों को दीक्षा दिलाई जाएगी।
महामंडलेश्वर और नागा साधु बनने के लिए अखाड़ों में आवेदन देना होता है जिसमें उन्हें जन्म से लेकर, माता-पिता और शैक्षिक योग्यता समेत तमाम जानकारियां देनी होती हैं। जिसके बाद इन आवेदनों की जांच होती है। जिलेदार अपनी जांच रिपोर्ट पंच परमेश्वर को देते हैं। पंच परमेश्वर उस रिपोर्ट की जांच कर सभापति को रिपोर्ट पहुंचाते हैं और फिर सभापति कुछ महात्माओँ से तथ्यों की जांच कराते हैं। इसके बाद ये प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इस बार श्रीनिरंजनी अखाड़े ने 6, जूना अखाड़ा ने 4, आवाहन अखाड़े ने दो महामंडलेश्वर पद के लिए दिए गए आवेदनों को रद्द कर दिया। इसी तरह इन अखाड़ों में नागा साधु बनने के लिए दिए गए आवेदनों में से 92 को रद्द कर दिया है।
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