मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन तेज
भोपाल । मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन तेज होने जा रहा है। मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इसके तहत 7 फरवरी को राजधानी भोपाल में सतपुड़ा भवन और प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया जाएगा।कर्मचारी संगठन 51 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन बहाली, लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान, पदोन्नति पर लगी रोक हटाने, वाहन और गृह भत्ता बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी का बंधन हटाने, परिवीक्षा अवधि 2 वर्ष करने और पेंशन के लिए अर्हता सेवा 25 वर्ष करने की मांग भी की जा रही है।
आंदोलन का चौथा चरण 16 फरवरी को
आंदोलन का चौथा चरण 16 फरवरी को होगा, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों से प्रतिनिधि भोपाल के आंबेडकर पार्क में एकत्रित होंगे। इस दौरान बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसे मोर्चा में शामिल सभी घटक संगठनों के प्रांताध्यक्ष और पदाधिकारी संबोधित करेंगे। कर्मचारी संगठन संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने, निगम-मंडल के कर्मचारियों को शासकीय सेवकों के समान लाभ देने और शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देने जैसी महत्वपूर्ण मांगों को लेकर भी आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा 16 फरवरी के बाद की जाएगी। भोपाल के आंबेडकर पार्क में कर्मचारी नेता इकट्ठे होंगे और आगे की रणनीति पर निर्णय लेंगे। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एमपी द्विवेदी बताते हैं कि 10 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। सत्र के दौरान कर्मचारी बड़ा आंदोलन करने पर विचार कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ये आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। इस बार सरकार को मांगों पर ठोस निर्णय लेना ही पड़ेगा, क्योंकि कर्मचारी बहुत नाराज हैं।
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