पुणे से सामने आया नया धर्मांतरण विवाद, Wipro कर्मचारी ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो टेक्नोलॉजीज की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हिंजवडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा है। पीड़ित महिला ने कंपनी के भीतर धार्मिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर भेदभाव और जबरन नौकरी से इस्तीफा दिलवाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि पिछले दस महीनों से वह जिस मानसिक प्रताड़ना और यातना का सामना कर रही थीं, उसे सामने लाना बेहद जरूरी था।
महिला ने आरोप लगाया कि वहां हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया जाता है और उन पर गलत मांगों को मानने या फिर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया जाता है। पूर्व कर्मचारी ने कंपनी के ऊंचे प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि जब भी ऐसी घटनाओं की शिकायत अधिकारियों से की जाती है, तो वे इसे अनसुना कर देते हैं और पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जाती है।
वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाया दुबई में शादी का दबाव बनाने का आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में कंपनी के कुछ सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लेते हुए उनके दुर्व्यवहार का खुलासा किया है। महिला के मुताबिक, शाहीन रफीक नाम की कर्मचारी ने नौकरी के पहले दिन से ही उसे परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने महिला पर कंपनी के कंट्री हेड रामकुमार के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। यही नहीं, आरोपी ने महिला से कहा कि वह इन संबंधों का फायदा उठाकर अपना ट्रांसफर दुबई करवा ले, जहां वह उसकी शादी किसी शेख से करवा देगी ताकि उसे आर्थिक मजबूती और शारीरिक संतुष्टि दोनों मिल सके।
मामले में पुलिस कार्रवाई और इस्तीफे का विवाद
अपनी शिकायत को लेकर पीड़िता ने बताया कि उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज करा दिया है और एफआईआर दर्ज करने के सिलसिले में पुलिस ने उन्हें बुलाया है। पुलिस का कहना है कि वे पहले इन गंभीर आरोपों की जांच करेंगे और उसके बाद ही औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। महिला ने बताया कि नौकरी से जबरन इस्तीफा दिलवाए जाने के बाद, 24 अप्रैल 2026 को उन्होंने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाया था और कंपनी से अपनी बर्खास्तगी का ठोस और लिखित कारण मांगा था।
महिला की मांग: नौकरी की वापसी और कार्यस्थल पर सुरक्षा
पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी मुख्य मांगें सामने रखी हैं। उनका कहना है कि उन्हें कंपनी से बिना किसी ठोस वजह के अवैध रूप से निकाला गया है, इसलिए उन्हें उनकी नौकरी वापस दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाली तमाम महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हर निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) की कंपनी और संगठन के भीतर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और समर्पित संस्थागत सिस्टम बनाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और महिला को ऐसे हालातों से न गुजरना पड़े।
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