रेलवे यात्रियों को मिलेगी भरोसेमंद सेवा, खराब तेल पर अब रोक
इंदौर: रेलवे स्टेशनों पर फूड वेंडर द्वारा तैयार की जाने वाली खाद्य सामग्री में अब बार-बार एक ही तेल का उपयोग नहीं हो पाएगा. रेलवे अब टीपीसी मशीनों के जरिए तेल की शुद्धता की नियमित जांच करेगा. आमतौर पर रेलवे स्टेशनों पर जो खाद्य सामग्री तैयार होती है, वह तेल के लिहाज से गुणवत्तापूर्ण नहीं मानी जाती.यही वजह है कि यात्रियों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए रतलाम रेलवे मंडल ने अपने अधीन रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल पर उपयोग होने वाले तेल की जांच के लिए टीपीसी मशीनों का उपयोग शुरू किया है.
'रेलवे स्टेशनों पर खाद्य तेल की होगी नियमित जांच'
पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि "रेलवे अब टीपीसी मशीनों के जरिए तेल की शुद्धता की नियमित जांच करेगा. खाद्य साम्रगी बनाने वाले खराब तेल का उपयोग नहीं कर सकेंगे. इसके लिए 8 टीपीसी मशीनें खरीदीं गई हैं. जिन्हें मंडल के सभी सेक्शनल वाणिज्य निरीक्षकों को उपलब्ध कराया जा रहा है."
'पहले दी जाएगी समझाइश फिर होगी कार्रवाई'
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि "टीपीसी मशीनों के प्रभावी उपयोग हेतु सभी वाणिज्य निरीक्षकों एवं मुख्य वाणिज्य निरीक्षकों को प्रशिक्षण एवं डेमो के माध्यम से इसकी कार्यप्रणाली समझाई जा रही है. टीपीसी मशीनों से जांच के बाद रेलवे के यात्रियों को शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने में बहुत मदद मिलेगी. जिन फूड स्टॉल पर उचित क्वालिटी का तेल नहीं पाया गया उन्हें पहले बदलने का कहा जाएगा, इसके बाद ऐसे फूड वेंडर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
क्या है यह मशीन और कैसे करती है जांच?
टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड) एक डिजिटल डिवाइस है, जो तेल में मौजूद टोटल पोलर मटेरियल (TPM/TPC) की जांच करती है. यदि टीपीएम 0 से 25 % होता है तो ये तेल उपयोग के लायक है, अन्यथा 25 प्रतिशत से ज्यादा टीपीएम होने पर तेल को बदलना जरूरी होता है.मशीन में लगे सेंसर (रॉड) को गर्म तेल में डालने पर स्क्रीन पर रंग-आधारित संकेत प्राप्त होते हैं. हरा रंग बताता है कि तेल की गुणवत्ता अच्छी है, पीला रंग बताता है कि तेल में टीपीसी का स्तर बढ़ रहा है, सावधानी आवश्यक है और लाल रंग बताता है कि तेल की गुणवत्ता हानिकारक स्तर पर पहुंच चुकी है, ऐसे में तत्काल तेल बदलना आवश्यक होता है.
गर्म तेल में करें टीपीएम की जांच
तेल को बार-बार उच्च तापमान पर गर्म करने और नमी के संपर्क में आने से उसमें उष्मीय अपघटन होता है. जिससे टोटल पोलर कंपाउंड बनते हैं. इनकी अधिक मात्रा तेल की गुणवत्ता में गिरावट को दर्शाती है, जो भोजन के स्वाद और पोषण मूल्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. यह डिवाइस तेल को 40 से 190 सेंटीग्रेड गर्म होने पर भी सही जांच करने में सक्षम है. इस डिवाइस में लाल, पीली और हरे रंग की लाइट से तत्काल तेल की स्थिति का पता चल जाता है कि यह कितने उपयोग के लायक है.
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