सड़क सुरक्षा और मवेशियों का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब देने को कहा
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लावारिस मवेशियों की आवाजाही रोकने के लिए दायर याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा। याचिका में प्राधिकरणों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे हाईवे पर मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक दिशानिर्देश तैयार करें और उन्हें सख्ती से लागू करें।
लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल नामक संगठन द्वारा दायर इस याचिका में विशेष रूप से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे की अनिवार्य घेराबंदी (फेंसिंग) की मांग की गई है। इसके अलावा, वैज्ञानिक तरीके से संचालित गौशालाओं/पशु आश्रयों की स्थापना के लिए निर्धारित फंडिंग सुनिश्चित करने और मवेशियों को अवैध रूप से छोडऩे पर कड़ी दंडात्मक जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है। याचिका में आवारा मवेशियों के कारण होने वाली सडक़ दुर्घटनाओं के पीडि़तों के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा व्यवस्था बनाने की भी अपील की गई है।
यह है मांग
समस्या पर राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश तैयार कर सख्ती से लागू करें
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में एनएच और एक्सप्रेसवे की फेंसिंग की जाए
गौशालाओं की स्थापना के लिए निर्धारित फंडिंग सुनिश्चित की जाए
मवेशियों को अवैध रूप से छोडऩे पर कड़ी दंडात्मक जिम्मेदारी तय हो
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