स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने महर्षि पतंजलि संस्थान के कैलेण्डर का किया विमोचन
भोपाल : स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को मंत्रालय में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान मध्यप्रदेश द्वारा प्रकाशित वार्षिक कैलेण्डर का विमोचन किया। कैलेण्डर में इस वर्ष की थीम भारतीय कालगणना को रखा गया है। इसके अंतर्गत माहवार काल की अवधारणा, कालमायन की इकाइयाँ. हिन्दी तिथियों का वैज्ञानिक आधार, सप्ताह, माह और वर्ष की अवधारणा, देवताओं व असुरों के दिन-रात, युग, ब्रह्मा की आयु, संवत्सर, पञ्चाङ्ग तथा संकल्प मन्त्र को स्थान दिया गया है। यह जानकारी भारतीय कालगणना की समझ के लिये अत्यंत उपयोगी रहेगी। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के निदेशक प्रभात राज तिवारी ने बताया कि अभी हमारे जितने केलेण्डर हैं, विक्रम संवत, ईसवी संवत, हिजरी संवत, कोई भी 2500 साल से पुराना नहीं है परंतु हमारा प्राचीन केलेण्डर भारतीय सभ्यता के अनुसार लाखों वर्ष पुराना है। उदाहरण के रूप में कलयुग के 5 हजार 125 वर्ष गुजर चुके हैं। इसके पूर्व सतयुग, द्वापर एवं त्रेता युग भी संपन्न हो चुके हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि भारतीय सभ्यता अत्यंत प्राचीन है। तथा दुनिया में इसका कोई भी समरूप नहीं है। इस कैलेण्डर में राज्य शासन के द्वारा घोषित समस्त शासकीय अवकाश एवं ऐच्छिक अवकाश को भी दर्शाया गया है, जिससे यह केलेण्डर बहुत उपयोगी बन गया है। इस केलेण्डर में तिथियों का परिवर्तन का समय भी दर्शाया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति यह निर्णय कर सकता है कि कौन सा त्यौहार कब से कब तक रहेगा। कैलेण्डर संबंधी विस्तृत जानकारी संस्थान की वेबसाइट www.mpssbhopal.org पर उपलब्ध है।
अपनों ने मोड़ा मुंह? ये 5 तरीके दिलाएंगे सफलता और आत्मविश्वास
नौतपा आने वाला है—तापमान करेगा रिकॉर्ड पार, ये उपाय जरूर करें
जालों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, धन और रिश्तों पर असर
राशिफल 30 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
हरी खाद- खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत होगी बेहतर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा की बेटी रिया केशरवानी को दी बधाई, दसवीं बोर्ड में प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल किया
खंडवा के डायल-112 हीरोज
सामाजिक सुरक्षा पेंशन इस विश्वास का अंतरण है कि सरकार हर घड़ी जरूरतमंदों के साथ है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सशक्त नारी, समृद्ध परिवार : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आत्मनिर्भरता का संबल