बुंदेलखंड में बदल रहा सब्जी की खेती का तरीका
छतरपुर। बुंदेलखंड अंचल में सब्जी की खेती का पैटर्न बदल रहा है और यहां कई तरह के नवाचार किए जा रहे हैं। छतरपुर शहर के देरी रोड करीब ढाई वर्ष तत्कालीन कलेक्टर संदीप जी आर के द्वार लगभग 12 एकड़ बंजर शासकीय भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया गया था। इसके बाद यहां फ्रूट फॉरेस्ट पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
तत्कालीन कलेक्टर संदीप जी आर का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। अतिक्रमणकारियों के कब्जे से छुड़ाई गई 12 एकड़ बंजर जमीन अब फल और ऑर्गेनिक वेजिटेबल फॉरेस्ट के रूप में विकसित हो चुकी है। किसान भगवत कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस 12 एकड़ जमीन पर मैथी, मटर, पालक, पत्तागोभी, टमाटर, मिर्च, गाजर, शलजम, मूली और चुकंदर जैसी जैविक सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसके अलावा लाल मूली इसमें खास है, जिसके बीज हिमाचल से लाकर बोए गए हैं। करीब आधा एकड़ जमीन में सब्जी उगाई जा रही है। इसके साथ ही अनेक राज्यों से मंगवाए गए फलदार पौधे भी अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं, जिनमें फल भी लगने लगे हैं। इस फ्रूट फॉरेस्ट की देख-रेख का जिम्मा छतरपुर के खनिज अधिकारी अमित मिश्रा संभाल रहे हैं। किसान भगवत कुशवाहा बताते हैं कि लाल मूली में फाइबर की मात्रा ज्यादा होने से पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह रक्त को शुद्ध करने में सहायक। त्वचा पर चमक आती है और वजन घटाने में मददगार, शरीर को फिट रखने के लिए लाभकारी है। लाल मूली में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो रक्तचाप को नियंत्रित करता है तथा हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। इसके सेवन से बालों में चमक आने की संभावना भी होती है।
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