यूथ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन चर्चा में, सीमित भागीदारी पर उठे सवाल
भोपाल। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस आलाकमान ने पूरे मध्य प्रदेश में चक्काजाम और प्रदर्शन का बिगुल फूंका था। इसी सिलसिले में राजधानी भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश दफ्तर का घेराव करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी। परंतु, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट रही और सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में महज 8 युवा कांग्रेस कार्यकर्ता ही शरीक होने पहुंचे।
हैरानी की बात यह रही कि आंदोलन स्थल पर जितने प्रदर्शनकारी मौजूद नहीं थे, उससे कई गुना ज्यादा तादाद वहां मुस्तैद पुलिस बल की थी। कार्यकर्ताओं की बेहद कम संख्या को देखते हुए तैनात पुलिसकर्मियों ने भी मुस्तैदी दिखाने या उन्हें पुतला फूंकने से रोकने की कोई खास जहमत नहीं उठाई। गिने-चुने कार्यकर्ताओं ने ही वहां पर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
पार्टी के कड़े फरमान का नहीं हुआ असर
विपक्षी दल के भीतर इस लचर प्रदर्शन को लेकर आंतरिक सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि 12 जून को ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने एक लिखित आदेश जारी किया था। इसमें युवा कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और महिला कांग्रेस की इकाइयों को 15 से 17 जून तक लगातार भाजपा कार्यालयों को घेरने और उग्र प्रदर्शन करने का जिम्मा सौंपा गया था। इस कड़े निर्देश के बाद भी भोपाल में कांग्रेसी कार्यकर्ता भाजपा दफ्तर तक मार्च करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और पूरा हंगामा पीसीसी बाउंड्री के बाहर ही सिमट कर रह गया।
प्रेस नोट के जरिए साख बचाने की कोशिश
भीड़ न जुटने के बाद उपजी फजीहत के बीच भोपाल शहर युवा कांग्रेस ने बाद में एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की। इस प्रेस नोट में उन्होंने इस बेहद छोटे प्रदर्शन को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के तानाशाही रवैये के खिलाफ 'लोकतंत्र को बचाने की बड़ी लड़ाई' करार दिया। इस विरोध मार्च की कमान जिला महासचिव अनीस शर्मा के हाथों में थी, जिसे युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमित खत्री के दिशा-निर्देशों पर अमलीजामा पहनाया गया था।
कागजों पर मजबूत और जमीन पर सिर्फ आठ
इस पूरे घटनाक्रम में जिला उपाध्यक्ष नीरज यादव, महासचिव दर्शन कोरी, ब्लॉक अध्यक्ष मोहन रुडेले सहित भूपेंद्र मिश्रा, रिजूल सेन, सूरज लोधी, भीम लोवंशी और सुजल समेत केवल आठ चेहरे ही मैदान में डटे दिखाई दिए। संख्या बल की इस भारी कमी के बावजूद, संगठन ने अपने बयानों में इस प्रदर्शन को बेहद आक्रामक, मजबूत और निर्णायक साबित करने का प्रयास किया।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल
युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमित खत्री ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप मढ़ा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना पूरी तरह से गैर-संवैधानिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इसे सत्तापक्ष की राजनीतिक दुर्भावना का नतीजा बताते हुए कहा कि इस फैसले से चुनाव आयोग की निष्पक्ष छवि कटघरे में आ गई है। खत्री ने चेतावनी दी कि युवाओं की टोली इस नाइंसाफी के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और जनता के अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
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