महाराजपुर। आर्य समाज महाराजपुर में रविवार को स्वामी दयानंद सरस्वती का बोधोत्सव पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न विद्वानों ने स्वामी जी के जीवन चरित्र की महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डाला और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं को रेखांकित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 9 बजे देवयज्ञ से हुआ, जिसके बाद विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता मध्यप्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री जयनारायण आर्य ने कहा कि जीवन में कभी-कभी एक छोटी सी घटना व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल देती है। स्वामी दयानंद सरस्वती का बचपन का नाम मूलशंकर था। महाशिवरात्रि की रात जब उन्होंने शिवलिंग पर चूहे को चढ़कर प्रसाद खाते और मूर्ति पर अपवित्रता करते देखा, तो उन्होंने सोचा कि जो स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकता, वह कैसे भगवान हो सकता है। इस घटना ने उनके मन में भूचाल मचा दिया और वे सच्चे शिव की खोज में घर-बार छोड़कर निकल पड़े। बाद में गुरु विरजानंद के सानिध्य में वेदों का गहन अध्ययन किया, आर्य समाज की स्थापना की और समाज को नई दिशा प्रदान की।
आर्य समाज के प्रधान उमेश कुमार आर्य ने बताया कि महर्षि दयानंद को तो बोध प्राप्त हो गया था, लेकिन आज समाज को उनके विचारों का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है। समाज में आर्य समाज के प्रति कई गलत धारणाएं व्याप्त हैं, जैसे कि यह ईश्वर को नहीं मानता। यह पूरी तरह असत्य है। स्वामी दयानंद ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के प्रथम समुल्लास में ही ईश्वर की महिमा और उसके विभिन्न नामों का गुणगान किया है।
आर्य समाज के उप मंत्री मुन्ना लाल कुशवाहा ने स्वामी दयानंद के जीवन की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके ब्रह्मचर्य बल पर प्रकाश डाला। वक्ता चितरंजन चौरसिया ने उनके दुर्लभ व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सत्य के मार्ग पर अडिग रहे और वेदों के सिद्धांतों पर कभी समझौता नहीं किया। रमेश सेन ने संध्या उपासना और हवन की महिमा बताते हुए कहा कि बिना संध्या उपासना के ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती। कार्यक्रम के संचालक सूर्य सेन आर्य ने स्वामी दयानंद के जीवन की प्रमुख घटनाओं का वर्णन किया और हर शनिवार आयोजित होने वाले महिला यज्ञ में मातृ शक्ति से शामिल होने की अपील की। अशोक आर्य ने मधुर भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन पर आर्य समाज महाराजपुर द्वारा आयोजित सत्यार्थ प्रकाश प्रतियोगिता में उत्तीर्ण प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, शील और आकर्षक पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।